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कैंसर का इलाज, बचाव व कारण
जब हमारे शरीर के किसी भाग मे कोशिका अनियंत्रित होकर वृद्धि करने लगती है तो उसे कैंसर कहते है। ये धीरे-धीरे अन्य भागो को भी अपने चपेट में ले लेती है।
कैंसर कई प्रकार के होते है जब शरीर के किसी भी हिस्से में तेजी से कोई गांठ बढ़ रही है तो वह कैंसर हो सकता है। अगर वह तेजी से वृद्धि नही कर रही हैं तो कैंसर होने संभावना कम होती है। क्योंकि हर गांठ कैंसर नही होती है। सिर मे कैंसर को टयूमर कहते है।

कैंसर होने के कारण -


कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे ध्रुमपान, जैनेटिक प्रोब्लम व खराब जीवनशैली आदि।
प्रत्येक व्यक्ति के शरीर मे दो प्रकार के जीन्स होते है कैंसर प्रमोटर और कैंसर सप्रेशन। जबतक इन दोनों के बीच संतुलन व तालमेल बना रहता है तबतक तो सब ठीक रहता है लेकिन जैसे ही इन दोनों का संतुलन व तालमेल बिगड़ जाता है तब कैंसर का जन्म होता है।
- जो लोग तम्बाकू का सेवन करते है उन्हें मुँह का कैंसर होने की संभावना रहती है।
- और जो लोग शराब पीते है उन्हें लीवर व पेट मे कैंसर होने की संभावना होती है।
- तथा जो लोग ध्रूमपान करते है यानी बीड़ी, सिगरेट व अन्य, उन्हें फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

कैंसर होने के लक्षण -


अगर कोई कैंसर से ग्रसित है तो उसका बहुत आसानी से पता लग जाता है। जैसे किसी भी व्यक्ति को भोजन नली में कैंसर है तो खाना निगलने में परेशानी होने लगती है।
इसी तरह अगर लीवर मे कैंसर है तो लीवर अपना असमान्य तरीके से करने लगता है। और अगर फेफड़ों में कैंसर है तो फेफड़ों का कार्य बाधित होने लगता है। तथा शरीर के किसी भी हिस्से में तेजी से गांठ का बढ़ना

कैंसर होने की जांच -


कैंसर की जांच कई तरीके से की जाती है और जांचो के बाद कैंसर का इलाज शुरू किया जा सकता है।

सी. टी. स्कैन - इसके जरिए कैंसर का पता लगाया जा सकता है और साथ मे इससे कैंसर की अवस्था का भी पता लग जाता है। लेकिन इसके जरिए सिर्फ मस्तिष्क के नीचे हिस्से में ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

एमआरआई - मस्तिष्क के कैंसर के लिए एमआरआई ही इकलौता सर्वश्रेष्ठ परीक्षण है ।

कैंसर का इलाज -


एक समय था जब कैंसर एक लाईलाज बीमारी के तौर पर जाना जाता था। लेकिन अब समय बदल चुका है। आज के समय मे कैंसर के इलाज के लिए कई नई तकनीक आ चुकी है। जैसे - रेडियो सर्जरी सिस्टम, साइबर नाईफ, टार्गेटेड थेरेपी व इम्यूनोथेरेपी

कैंसर से बचाव


- स्वास्थ्यकर आदते डाले और ध्रुमपान व शराब से परहेज करे।
- पौष्टिक भोजन करे। और हरी सब्जियों व फलो का अधिक सेवन करे।
- नियमित रूप से व्यायाम करे।
- HIV व वायरस से होने वाले हेपेटाइटिस से बचाव करे।
- 50  से अधिक उम्र वाले व्यक्ति को साल मे एक बार PSA टेस्टिंग अवश्य कराये। क्योंकि 50 के बाद प्रोटेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
- अगर आप कई दिनों से असहज व असमान्य महसूस कर रहे है तो डाक्टर से शीघ्र मिले।